Wednesday, 5 April 2023

जयंती-जन्मोत्सव

त्योहारों के समय भाषा के प्रति हमारी जिज्ञासा अधिक सचेत, सजग हो जाती है। बातें छोटी होती हैं लेकिन नए-नए आयाम जोड़ दिए जाते हैं। दिवाली कहें या दीवाली, रमजान या रमादान, व्रत या उपवास, नवरात्र या नवरात्रि, जयंती या जन्मोत्सव? ताजा बहस हनुमान जी की जयंती को लेकर है कि इसे जयंती कहना ठीक है या जन्मोत्सव।
 
यों प्रत्येक शब्द के साथ एक या एक से अधिक अर्थ संकल्पनाएँ जुड़ी होती हैं फिर भी प्रसंग और प्रयोग के अनुसार अर्थ भिन्नता होती है। एक ही शब्द भिन्न संदर्भों में भिन्न अर्थ देता है। जहाँ तक जयंती शब्द का संबंध है, इसकी उत्पत्ति संस्कृत भाषा की धातु √जि (जीतना to conquer, उन्नति करना, to prosper) से है। जिसका अर्थ है विजय करनेवाली, विजयिनी। इसीलिए दुर्गा का एक नाम जयंती है। 
"जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी.
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥"

रथों, मंदिरों पर फहरने वाली ध्वजा भी जयंती (=जीत दिलाने वाली) है। कुछ शुभ और उपयोगी वनस्पतियों का नाम जयंती है। वैजयंती, विजया, जया परस्पर पर्याय हैं।
 जन्मदिन को वर्षग्रंथि या वर्षगांठ भी कहा जाता है। 'वर्षगांठ' से उत्तररामचरित की यह पंक्ति याद आती है 
''वत्से देवयजनसंभवे सीते! अद्य खल्वायुष्मतोः कुशलवयोः द्वादशस्य जन्मवत्सरस्य संख्यामंगलग्रन्थिः अभिवर्तते।"

साल पूरा होने पर मनाई जाने वाली वर्षगाँठ ही जयंती, जन्मदिन, जन्मदिवस है। देवी-देवता के अवतरण या प्राकट्य दिवस को जयंती कहा जाता है। उसे उत्सव के रूप में मनाएँ तो जन्मोत्सव भी कहा जा सकता है। इधर कुछ वर्षों से परंपरा सी बन गई है कि दिवंगत व्यक्ति के जन्मदिनको ही जयंती कहें। जबकि व्यवहार में ऐसा नहीं है। जीवित व्यक्ति की भी 25-वीं वर्षगांठ रजत जयंती, 50-वीं स्वर्णजयंती और 75 वीं हीरक जयंती मनाई जाती है! जन्म-जयंती कहना अनावश्यक दुहराव है। 

जयंती विवाद पर एक बात और। हिंदी भाषियों के लिए जो श्रीकृष्ण जयंती जन्माष्टमी या श्रीकृष्णाष्टमी है, वह तमिल भाषियों के लिए श्रीजयंती है। इसी से समझा जा सकता है कि यह प्रयोग कितना पुराना है।