Tuesday, 14 October 2025
तालिबान
Monday, 11 August 2025
गर्भनाल, पान का बीड़ा और बेड़ई रोटी
Wednesday, 2 July 2025
क्राइस्ट और घी
Monday, 23 June 2025
काला-गोरा
Thursday, 29 May 2025
घर-घर सिंदूर
Wednesday, 28 May 2025
इराज या ईरज
'इराज' की हलचल
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किसी नवजात शिशु का क्या नाम रखा जाए, यह उसके माता-पिता का प्रथम और परम अधिकार है तथा परिवार का आंतरिक मामला। इसलिए मैं नाम के बारे में पूछे गए प्रश्नों को टाल दिया करता हूँ। आज 'इराज' नाम सोशल मीडिया पर छाया हुआ है और अनेक मित्रों ने मुझे टैग किया है और डीएम से पूछ रहे हैं।
क्योंकि 'इराज' ने एक राजनीतिक घराने में जन्म लिया है, इसलिए लोग इस नाम को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियाँ कर रहे हैं। कुछ तो इसे फ़ारसी और उर्दू का नाम बताकर मुस्लिम तुष्टीकरण से जोड़ रहे हैं। ट्रोलों की बात का उल्लेख व्यर्थ है। हाँ, लालू जी का हवाला देकर किसीने लिखा है कि नवजात ने मंगलवार को जन्म लिया इसलिए इराज नाम रखा गया क्योंकि यह हनुमान का नाम है।
इराज को हनुमान जी से कैसे जोड़ा गया है, यह मैं नहीं जानता। इतना अवश्य है कि यह संस्कृत का नाम है। इरा, इला, इळा, इडा (=पृथ्वी, सुरा, वाणी, जल आदि) समान हैं और वैदिक काल से एक नाम की चारों वर्तनियाँ प्रचलित हैं। संस्कृत भाषा के दो प्रसिद्ध कोश शब्दकल्पद्रुम और वाचस्पत्यम् में हलायुध को उद्धृत किया गया है और उसके अनुसार 'इरा' से जन्मा इराज, कामदेव का नाम है। (इरया मद्येन जायते इति इराज: कन्दर्पः )। आप्टे और मोनियर विलियम्स के कोश में भी इराज (इरा+ज= इरा से जन्मा) का अर्थ कामदेव दिया गया है। भूमिपुत्र, पृथ्वीपुत्र, वाणी पुत्र, जलज इत्यादि इराज के पर्याय हो सकते हैं। मंगल को भी पृथ्वी का पुत्र माना गया है।
संस्कृत के सुप्रसिद्ध विद्वान और नामार्थ विचारक नित्यानंद मिश्र ने एक दूसरी दिशा की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया है। प्रेरणा और गति के अर्थ में संस्कृत में एक धातु है ईर्। ईर् से अच् प्रत्यय जोड़ने पर बनता है ईर अर्थात पवन, वायु। ईरज (ईर+ज) का अर्थ पवन पुत्र हनुमान होगा। अंग्रेजी भाषा की रोमन वर्तनी ने ईरज (Iraj) को इराज बना दिया।
जन्म लेते ही बच्चों के नाम ने इतनी हलचल मचा दी है तो आशा की जा सकती है कि आगे वह अपने कार्यों से भी हलचल मचा कर प्रसिद्ध होगा।
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Saturday, 24 May 2025
कटहल कथा
Friday, 28 March 2025
मनीष और मनीषा
मनीष का सच 🤗
क्या कभी गौर किया है कि हिंदी में और अन्य भारतीय भाषाओं में भी मनीष नाम बहुत प्रचलित है किंतु ऋषिकेश की ही भाँति यह मनीष भी व्याकरण सिद्ध नहीं है, लोक सिद्ध है। आप यदि शब्दकोश में ढूँढ़ें तो आपको मनीषा, मनीषी तो मिलेंगे लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि मनीष कहीं नहीं मिलेगा।
संस्कृत में मन अनेकार्थी है। पूजा, आदर करने के अर्थ में मन् धातु से मनस् (मन्यतेऽनेन) से मन बनता है। मन से निर्मित अनेक शब्द संस्कृत ,हिंदी तथा अन्य अनेक भारतीय भाषाओं में हैं — सुमन, दुर्मन, मानस ,मनस्वी, मनोहर आदि। मन के अनेक अर्थों में प्रमुख हैं— हृदय, समझ, प्रत्यक्षज्ञान, प्रज्ञा,चेतना, निर्णय या विवेचन की शक्ति ।
अभी एक और घटक रह गया - ईषा। ईषा कहते हैं हल के उस भाग को जिसमें नीचे फाल लगा होता है और ऊपर से नियंत्रित करने के लिए हत्था। ईषा के बिना खुदाई नहीं हो सकती खेती के लिए खेत तैयार नहीं हो सकता।
मनीषा शब्द इसी मनस् (मन) और ईषा से व्युत्पन्न हुआ है। गीता में भगवान कृष्ण ने माना है कि मन को नियंत्रित करना कठिन है। भाषा में भी मन के साथ जब ईषा जुड़ती है तभी कुछ सार्थक काम हो सकता है। मनीषा अर्थात मनसः ईषा (मन की प्रज्ञा, बुद्धि जो उसे नियंत्रण में रखती है)। मनीषा का कोशगत अर्थ है मन की वह विशेष शक्ति जिससे वह विचार आदि करता है। गंभीर चिंतन करने की मानसिक शक्ति मनीषा कहलाती है। इसे चाह, कामना, प्रज्ञा, समझ, सोच, बुद्धि, मति, चेतना इत्यादि भी कहा गया है। मनीषा स्त्रीलिंग नाम है इसलिए लड़कियों के नाम के लिए बहुत सार्थक और लोकप्रिय शब्द है। मनीषा से विशेषण बनता है मनीषी। मनीषा जिसमें है वह मनीषी अर्थात ज्ञानी, बुद्धिमान, विद्वान।
अनेक भाषाओं में जहाँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द अलग-अलग नहीं हैं , वहाँ पुल्लिंग शब्द को मूल मानकर उसके साथ कोई प्रत्यय जोड़कर स्त्रीलिंग बना लिया जाता है। हिंदी में स्त्रीलिंग बनाने के लिए अनेक प्रत्यय हैं किंतु तत्सम शब्दों के हिंदी स्त्रीलिंग बनाने के लिए अधिकतर आ तथा ई प्रत्यय जोड़ते हैं। दूसरे शब्दों में आ और ई से अंत होने वाले अधिकतर तत्सम शब्द स्त्रीलिंग होते हैं।
हिंदी में भी प्राय: मूल पुल्लिंग शब्दों से स्त्रीलिंग बना लिए जाते हैं, किंतु मनीषा स्त्रीलिंग के संदर्भ में मनीष पुलिंग के अस्तित्व की की संभावना नहीं है। यह अपवाद है! यहाँ शब्द निर्माण का क्रम पुल्लिंग से स्त्रीलिंग नहीं, मूल मनीषा (स्त्रीलिंग) से मनीष (पुल्लिंग) बना लिया गया है। मनीष उन गिने-चुने शब्दों में से है जो संस्कृत व्याकरण को अंँगूठा दिखाते हुए हिंदी में हैं और हिंदी के हैं।
अब आप यह नहीं कह सकते कि हिंदी पुरुष प्रधान भाषा है।