शब्दों में समय के साथ धीरे-धीरे अर्थ विस्तार और अर्थ संकोच होना सामान्य भाषिक प्रक्रिया है, जो लोकप्रयोग से धीरे-धीरे होती है। ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि रातोंरात किसी शब्द का अर्थविस्तार हो जाए; जैसे 'तालिबान' के साथ हुआ है।
अरबी मूल के शब्द तालिब का मूल अर्थ है तलाश करने वाला, खोजी, ढूँढ़ने वाला, जिसे किसी इल्म की तलब हो, विद्यार्थी। तालिब का बहुवचन तालिबान अर्थात विद्यार्थी गण। यह शब्द मूल रूप से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के इस्लामी मदरसों में पढ़ने वाले अफ़गान छात्रों के समूह के लिए प्रयुक्त नाम था, जो आगे चलकर अफ़ग़ानिस्तान में एक कट्टरपंथी इस्लामी राजनीतिक आंदोलन के रूप में उभरा। इसलिए तालिबान शब्द का मूल अर्थ खो गया और इसे कट्टर इस्लामी आतंकवाद से जोड़ दिया गया। इसे तालिबान का पहला अर्थ विस्तार कहा जा सकता है।
अफ़गानिस्तान की कट्टरवाद समर्थक तालिबान सरकार को रूस के अतिरिक्त विश्व की किसी भी सरकार ने मान्यता प्रदान नहीं की है। भारत ने भी अफगानिस्तान से अपने कूटनीतिक संबंध समाप्त कर लिये। औपचारिक संबंध न रहते हुए भी अचानक अचानक हुई राजनीतिक सरगर्मियों के परिणाम स्वरूप अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के साथ तालिबानी प्रतिनिधि मंडल के भारत आने पर तालिबान शब्द भी फिर से मुख्य धारा में आ गया।
कल तक जिसे गाली के स्तर का अपमानजनक शब्द माना जाता था, वही अब शिष्ट-संभ्रांत विशेषण बन गया।
देर-सवेर शब्दों की भी तकदीर बदलती तो है।
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