Friday, 28 March 2025

मनीष और मनीषा

मनीष का सच 🤗
क्या कभी गौर किया है कि हिंदी में और अन्य भारतीय भाषाओं में भी मनीष नाम बहुत प्रचलित है किंतु ऋषिकेश की ही भाँति यह मनीष भी व्याकरण सिद्ध नहीं है, लोक सिद्ध है। आप यदि शब्दकोश में ढूँढ़ें तो आपको मनीषा, मनीषी तो मिलेंगे लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि मनीष कहीं नहीं मिलेगा।
संस्कृत में मन अनेकार्थी है। पूजा, आदर करने के अर्थ में मन् धातु से मनस् (मन्यतेऽनेन) से मन बनता है।  मन से निर्मित अनेक शब्द संस्कृत ,हिंदी तथा अन्य अनेक भारतीय भाषाओं में हैं — सुमन, दुर्मन, मानस ,मनस्वी, मनोहर आदि। मन के अनेक अर्थों में प्रमुख हैं— हृदय, समझ, प्रत्यक्षज्ञान, प्रज्ञा,चेतना, निर्णय या विवेचन की शक्ति ।
अभी एक और घटक रह गया - ईषा। ईषा कहते हैं हल के उस भाग को जिसमें नीचे फाल लगा होता है और ऊपर से नियंत्रित करने के लिए हत्था। ईषा के बिना खुदाई नहीं हो सकती खेती के लिए खेत तैयार नहीं हो सकता।
मनीषा शब्द इसी मनस् (मन) और ईषा से व्युत्पन्न हुआ है। गीता में भगवान कृष्ण ने माना है कि मन को नियंत्रित करना कठिन है। भाषा में भी मन के साथ जब ईषा जुड़ती है तभी कुछ सार्थक काम हो सकता है। मनीषा अर्थात मनसः ईषा (मन की प्रज्ञा, बुद्धि जो उसे नियंत्रण में रखती है)। मनीषा का कोशगत अर्थ है मन की वह विशेष शक्ति जिससे वह विचार आदि करता है। गंभीर चिंतन करने की मानसिक शक्ति मनीषा कहलाती है। इसे चाह, कामना, प्रज्ञा, समझ, सोच, बुद्धि, मति, चेतना इत्यादि भी कहा गया है। मनीषा स्त्रीलिंग नाम है इसलिए लड़कियों के नाम के लिए बहुत सार्थक और लोकप्रिय शब्द है। मनीषा से विशेषण बनता है मनीषी। मनीषा जिसमें है वह मनीषी अर्थात ज्ञानी, बुद्धिमान, विद्वान।
अनेक भाषाओं में जहाँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द अलग-अलग नहीं हैं , वहाँ पुल्लिंग शब्द को मूल मानकर उसके साथ कोई प्रत्यय जोड़कर स्त्रीलिंग बना लिया जाता है। हिंदी में स्त्रीलिंग बनाने के लिए अनेक प्रत्यय हैं किंतु तत्सम शब्दों के हिंदी स्त्रीलिंग बनाने के लिए अधिकतर आ तथा ई प्रत्यय जोड़ते हैं। दूसरे शब्दों में आ और ई से अंत होने वाले अधिकतर तत्सम शब्द स्त्रीलिंग होते हैं।
हिंदी में भी प्राय: मूल पुल्लिंग शब्दों से स्त्रीलिंग बना लिए जाते हैं, किंतु मनीषा स्त्रीलिंग के संदर्भ में मनीष पुलिंग के अस्तित्व की की संभावना नहीं है। यह अपवाद है! यहाँ शब्द निर्माण का क्रम पुल्लिंग से स्त्रीलिंग नहीं, मूल मनीषा (स्त्रीलिंग) से मनीष (पुल्लिंग) बना लिया गया है। मनीष उन गिने-चुने शब्दों में से है जो संस्कृत व्याकरण को अंँगूठा दिखाते हुए हिंदी में हैं और हिंदी के हैं।
अब आप यह नहीं कह सकते कि हिंदी पुरुष प्रधान भाषा है।

No comments:

Post a Comment