🏺 ✟ ✡
घृत की व्युत्पत्ति है- √घृ सेके छादने च, (लेप करना, अभिषेक करना, चुपड़ना, चमकाना to annoint, rub, moisten, shine) + क्त प्रत्यय।
क्राइस्ट शब्द ग्रीक ख्रिस्टोस> लैटिन क्रिस्टस से है जिसका अर्थ है अभिषिक्त, anointed one। क्राइस्ट शब्द का संबंध है पुराभारोपीय मूल √*घॄइ से (from PIE root *ghrei- "to rub" – Online Etymological Dictionary).
भारत की तरह प्राचीन यूनान में भी विशेष अवसरों पर, जैसे राज्याभिषेक आदि, सुगंधित तेल या घी से अभिषेक करने की, छिड़ककर पवित्र करने, उसे शरीर पर लगाकर उसे चमकाने, कांतिमान बनाने की प्रथा थी। पुराणों में एक अप्सरा का और दुर्गा का घृताची नाम मिलता है जिसका अर्थ है घी से अभिषिक्त, घी जैसी स्निग्ध।
सो ग्रीक या लैटिन व्युत्पत्ति के अनुसार क्राइस्ट का अर्थ होगा "Anointed One" अर्थात घृताभिषिक्त।
यह टिप्पणी आपको दूर की कौड़ी बुझाना जैसी लग सकती है किंतु भारत से लेकर यूरोप तक दोनों महाद्वीपों की अधिकांश भाषाओं का मूल स्रोत एक ही है। इसलिए उन सबको भारोपीय भाषा परिवार कहा जाता है। हम जब देशभक्ति के आवेश में कहते हैं कि विश्व की सारी भाषाएँ संस्कृत से निकली हैं तो यह विचारना भूल जाते हैं कि आखिर संस्कृत भी तो कहीं, किसी से विकसित हुई होगी। इसलिए भाषा वैज्ञानिकों ने इन सभी भाषाओं के प्रकल्पनात्मक स्वरूप PIE (पुरा-भारोपीय) को माना जिससे एशिया और यूरोप की अधिकांश भाषाएँ विकसित हुईं।
No comments:
Post a Comment