यह कहना कठिन है कि हिंदी में सबसे बड़ा शब्द क्या है। संभवतः इस प्रकार का कोई प्रामाणिक कार्य हुआ भी नहीं है। हिंदी का उपहास करने वाले लोग दो शब्दों को उद्धृत करते हैं जो कभी प्रयोग में नहीं रहे!
~ लौहपथगामिनीवश्रामस्थल .... (रेलवेेेे स्टेशन)
~ लम्बदंडगोलपिंडधरपकडप्रतियोगिता ..(क्रिकेट मैच)
हिंदी में भी अन्य भाषाओं की भाँति उपसर्ग और प्रत्ययों से नए शब्द निर्मित किए जा सकते हैं। संस्कृत में उपसर्ग प्रत्यय के अतिरिक्त संधि और समास से भी पदों को बहुत लंबा किया जा सकता है किंतु हिंदी क्योंकि भी योगात्मक भाषा है और खुलापन पसंद करती है इसलिए द्वंद समास के अतिरिक्त प्रायः समस्त पदों को अलग शब्द माना जाता है।
निम्नलिखित कुछ शब्द हिंदी साहित्य में प्रयुक्त हैं और उनकी गणना बड़े शब्दों में हो सकती है
जलकमलपत्रवत् (8अक्षर)
परदुखकातरता (8)
कोटिब्रह्माण्डनायक (8)
स्थालीपुलाकन्याय (7)
किंकर्तव्यविमूढ़ताग्रस्त (10)
महाअभिनिष्क्रमण (8)
रूपोद्यानप्रफुल्लप्रायकलिका (12)
लावण्यलीलामयी (7)
प्रागैतिहासिकता (7)
इनमें 12 अक्षरों वाले "रूपोद्यानप्रफुल्लप्रायकलिका" को सबसे बड़ा शब्द माना जा सकता है। इसका प्रयोग अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' के द्वारा 'प्रियप्रवास' में किया गया है। लेकिन यह भी सच है की हरिऔध के अतिरिक्त और किसी ने इस शब्द का प्रयोग कहीं नहीं किया। राधा जी की सुंदरता का वर्णन करते हुए कवि ने निम्नलिखित छंद में इसका प्रयोग किया है
रूपोद्यानप्रफुल्लप्रायकलिका राकेन्दुबिम्बानना।
तन्वंगी कल-हासिनी सुरसिका क्रीड़ाकलापुत्तली॥
शोभा वारिधि की अमूल्य मणि-सी लावण्यलीलामयी।
श्रीराधा मृदुभाषिणी मृगदृगी माधुर्य की मुर्ति थीं॥
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