👍 ठेंगा, कुतका और घुत्ता 👍
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हिंदी में व्यापक रूप से प्रचलित ठेंगा शब्द "अंगुष्ठ" से है। अंगुष्ठ से अँगूठा > गूँठा > ठेंगा (वर्ण विपर्यय से)।
ठेंगा से कुछ मुहावरे हैं
ठेंगे पर रखना (कोई परवाह न करना) बड़े चौधरी बने फिरते हो, हम तुम्हें ठेंगे पर रखते हैं।
ठेंगा दिखाना (मना कर देना, धृष्टता पूर्वक अस्वीकार करना) बड़े भरोसे से सहायता माँगी थी किंतु उन्होंने ठेंगा दिखा दिया।
ठेंगे से (बला से) - उसकी कमाई मेरे ठेंगे से। मैं चिंता नहीं करता।
ठेंगा बजना (मारपीट होना)। जैसे यह कहावत:
जिसका काम उसी को साजे ।
और करें तो ठेंगा बाजे ।
ब्रज और बुंदेलखंडी में ठेंगे के लिए 'कुतका' शब्द का प्रयोग भी किया जाता है। "ये ले ठेंगा मेरा'' के लिए "कुतका लै लै मेओ" कहा जाता है। कुमाउँनी में यह कुतका > घुत्ता हो गया है।
~ म्यर घुत्त ली ले - (मेरा ठेंगा ले ले)।
~ म्यार् घुत्त में - (मेरे ठेंगे पर) !
ठेंगा के लिए पश्चिमी हिंदी क्षेत्र में कहीं ठोसा शब्द भी है।
ठेंगा के लिए पश्चिमी हिंदी क्षेत्र में कहीं ठूँसा/ठोसा शब्द भी है। कुतका, ठोसा देशज प्रतीत होते हैं।
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rakeshrocky1705@gmail.com
ReplyDeleteबहुत ज्ञानवर्धक।
ReplyDeleteसुंदर ...
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