Saturday, 4 April 2026

याहू!

 शम्मी कपूर की फिल्म "जंगली" में उसके इस गाने से "याहू" शब्द बड़ा प्रसिद्ध हुआ था। 
"याहू!
चाहे कोई मुझे जंगली कहे,
कहने दो जी कहता रहे,
हम प्यार के तूफ़ानों में घिरे हैं–
हम क्या करें!
याहू!"
गाने के बीच शम्मी कपूर "याहू!" ऐसे झटके में कहता है कि प्रत्येक सुनने-देखने वाला चौंकता है। फ़िल्म में याहू शब्द समझ में आए, चाहे न आए, उसकी प्रस्तुति से अर्थ स्पष्ट हो जाता है कि वह एक उत्साह बढ़ाने वाला नारा या सफलता की एक चीख है। 

वस्तुत: याहू अरबी भाषा से आया हुआ शब्द है। रेख़्ता शब्दकोश के अनुसार याहू ईश्वर को संबोधित करता हुआ एक शब्द, ईश्वर का एक नाम है– "हे ईश्वर!" फ़क़ीरों, कलन्दरों योगियों, संतों और तपस्वियों आदि का नारा जो वे ईश्वर की याद में लगाते हैं। कबूतरों की एक प्रजाति कबूतर-ए-याहू कहलाती है जिसके बारे में यह विश्वास है कि इनकी आवाज़ 'याहू' ध्वनि से मिलती है।
जनाब हैदर अली आसिफ़ साहब का एक शेर है–े
दिल-लगी अपनी तिरे ज़िक्र से किस रात न थी
सुब्ह तक शाम से या-हू के सिवा बात न थी

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